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कम खर्च में अधिक आय के लिए जरूरी है समसामयिक सुझाव के अनुसार खेती


बेगूसराय, 21 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार खेती में लागत कम कर किसानों की आय में वृद्धि के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम की बेरुखी के मद्देनजर बिहार सरकार डीजल अनुदान सहित अन्य सहयोग दे रही है। इसके साथ ही प्रगतिशील और समय पर खेती के लिए कृषि विज्ञान केंद्र समसामयिक सुझाव के माध्यम से किसानों को समय पर सही खाद एवं बीज के साथ खेती करने के लिए जागरूक करते रहता है।

अभी जब मौसम बेईमान हो गया है, खेतों में पानी लगे रहने के बदले धूल उड़ रही है तो ऐसे में बेगूसराय के कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर द्वारा तमाम फसल और सब्जी के संबंध में एक बार फिर समसामयिक सुझाव जारी किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान एवं वरीय वैज्ञानिक डॉ. रामपाल ने बताया कि समय पर उन्नत खेती के लिए समसामयिक सुझाव के माध्यम से किसानों को जानकारी दी जाती है, समय-समय पर प्रेरित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि किसान अभी धान की 25-30 दिनों की फसल में प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम नाइट्रोजन का उपरिवेशन करें। अगात धान की फसल में खैरा बीमारी दिखाई पड़ने पर खेतों में पांच किलो जिंक सल्फेट एवं 25 किलो बुझा चूना को पांच सौ लीटर पानी में घोल बना कर एक हेक्टेयर में आसमान साफ रहने पर छिड़काव करें। पिछात रोपी गई धान में खरपतवार नियंत्रण के कार्य को प्राथमिकता दें।

मक्का की खड़ी फसल में तना छेदक कीट की निगरानी करें बचाव के लिए कार्बोफ्यूरान- थ्री जी का सात किलो हेक्टेयर की दर से पौधे के गाभा में डालें। ऊंची जमीन में 25 अगस्त के बाद सितम्बर अरहर की बुआई कर सकते है। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलो नाइट्रोजन, 45 किलो फास्फोरस, 20 किलो पोटास तथा 20 किलो सल्फर का व्यवहार करें। अरहर की पूसा-नौ तथा शरद प्रभेद उत्तर बिहार के लिए अनुसंशित है। बुआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें। बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए।

फूलगोभी की अगात किस्में कुंआरी, पटना अर्ली, पूसा कतकी, हाजीपुर अगात, पूसा दिपाली की रोपाई समाप्त करें। बोरान तथा मॉलिब्डेनम तत्व की कमी वाले खेत में दस से 15 किलो ग्राम बोरेक्स तथा एक-दो किलो अमोनियम मालिब्डेट का व्यवहार खेत की तैयारी के समय करें। फुलगोभी की मध्यकालीन किस्में अगहनी, पूसी, पटना मेन, पूसा सिन्थेटिक-एक, पूसा शुभ्रा, पूसा शरद, पूसा मेघना, काशी कुंवारी एवं अर्ली स्नोबॉल किस्मों की बुआई नर्सरी में उथली क्यारियों में पंक्तियों में करें। पौधशाला को तेज धूप अथवा वर्षा से बचाने के लिए 40 प्रतिशत छायादार नेट से छह-सात फीट की ऊंचाई पर ढ़ंकने की व्यवस्था करें।

खरीफ प्याज की रोपाई के लिए खेतों को समतल कर छोटी-छोटी उथली क्यारियां बनाएं जिसकी चौड़ाई दो मीटर एवं लंबाई तीन से पांच मीटर तक रख सकते हैं। प्रत्येक दो क्यारियों के बीच जल निकास के लिए नाला जरुर बनाएं। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेमी, पौध से पौध की दूरी दस सेमी पर रोपाई करें। परवल की राजेन्द्र परवल-एक, राजेन्द्र परवल-दो, एफपी-एक, एफपी-तीन, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, आईआईभीआर-एक आदि किस्मों की रोपनी करें। बीज दर 25 सौ गुच्छियां प्रति हेक्टेयर तथा लगाने की दूरी दो-दो मीटर रखें। परवल की रोपाई के लिए प्रति गड्ढ़ा तीन से पांच किलो कम्पोस्ट, नीम या अंडी की 250 ग्राम खल्ली, एक सौ ग्राम एसएसपी, 25 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटास एवं दस से 15 ग्राम थिमेट का उपयोग करें।

दुधारू पशुओं के बाड़े को सूखा रखें। मक्खी एवं किलनी से बचाव के लिए अमीत्राज दवा दो एमएल को दो लीटर पानी में मिलाकर पशुओं के शरीर पर लगाएं तथा बाड़े में छिड़काव करें। सभी पशुओं को उचित कृमिनाशक दवा पिलाएं, पशुओं को धूप एवं गर्मी में चराई में नहीं भेजें। चारा-दाना सुबह एवं देर शाम जब गर्मी कम हो तो दें। अगर पशुओं को खुरपका मुंहपका और गलाघोंटू रोगों का टीका नहीं लगवाएं हैं तो जरूर लगवा लें। प्रत्येक वयस्क पशु को 50 ग्राम नमक एवं 50 ग्राम खनिज मिश्रण प्रतिदिन दें।