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आम और लीची के पेड़ पर लदे मंजर की जरुरी है देखभाल, करें छिड़काव : डॉ. रामपाल


बेगूसराय, 25 फरवरी (हि.स.)। बसंत ऋतु के उमंग में पूरा वातावरण झूम रहा है, आम और लीची के पेड़ में लद चुके मंजर की खूशबू से बगीचा सराबोर है। बिहार में मुजफ्फरपुर के बाद बेगूसराय का बजलपुरा का इलाका लीची के लिए बिहार ही नहीं, आस-पड़ोस के राज्यों में भी चर्चित है। बजलपुरा सहित पूरे बेगूसराय में बड़े पैमाने पर लीची के साथ आम की भी खेती होती है। अभी आम-लीची का सीजन आ चुका है और पेड़ मंजर से लद चुके हैं। किसानों ने उसकी समुचित देखभाल शुरू कर दी है, नियमित रूप से पटवन के साथ कीटनाशक सहित सभी आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।

इस बीच डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय द्वारा किसानों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया गया है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामपाल ने बताया कि काफी हद तक मंजर निकल चुका है। जिन किसान भाईयों ने अभी किसी दवा का छिड़काव नहीं किए हैं, वह तुरंत एक कीटनाशक का छिड़काव करें, लेकिन ध्यान रखें कि यदि फूल खुल गया हो तो किसी दवा का छिड़काव नहीं करें। उन्होंने छिड़काव के संबंध में दवा की जानकारी देते हुए बताया कि नीम आधा आधारित कीटनाशक पांच मिली प्रति लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। भुनगा कीट एवं दहिया रोग से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 0.5 मिली तथा घुलनशील गंधक दो ग्राम प्रति लीटर या कैराथेन एक मिली प्रति लीटर या कलेक्सीन एक मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। जब फल मटर दाने की अवस्था में हो तो गिरने से रोकने के लिए प्लानोफिक्स एक मिलीलीटर दवा 4.5 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

इसी समय से आम में सिंचाई शुरू करें, तना से 1.5 मीटर की दूरी पर 20-25 सेंटीमीटर चौड़ी नाली थाला बनाकर 10-15 दिनों पर आवश्यकतानुसार दो-तीन सिंचाई करें। यदि भूनगें का प्रकोप दिखाई दिखाई दे तो उपयुक्त दवा का इस्तेमाल करें। इस अवस्था में सुक्ष्म पोषक तत्व मल्टीप्लेक्स का छिड़काव दो मिलीलीटर प्रति लीटर की दर से लाभदायक है। बगीचे में फल मक्खी की समस्या से बचाव के लिए 0.1 प्रतिशत मिठाई यूजिनॉल एवं 0.1 परतिऊ मेलाथियान के घोल का फेरोमेन ट्रैप लगाना चाहिए। फल को सड़ने से बचाने के लिए कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी एक ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। डॉ. रामपाल ने कहा कि किसान भाई ध्यान रखें कि हर छिड़काव में एक स्टीकर या गोंद 0.6 मिलीलीटर अवश्य उपयोग करें, इससे दवा काफी कारगर हो जाती है। फल को फटने से बचाने के लिए दो ग्राम बोरेक्स प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।