Sun. Jun 26th, 2022

आकांक्षी जिला कार्यक्रम ने बदल दी विद्यालयों की गतिविधि, अब प्रार्थना नहीं होता है चेतना सत्र


बेगूसराय, 23 मई (हि.स.)।सशक्त सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीयता से जोड़कर राष्ट्र की प्रगति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया आकांक्षी जिला अभियान (एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम) के तहत चयनित क्षेत्रों को एक नई दिशा दे रहा है। आकांक्षी जिला अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के चयनित तमाम जिलों में पांच व्यापक विषय, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास तथा बुनियादी ढांचे के तहत 49 प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) पर कार्य चल रहे हैं और यह प्रमुख संकेतक में की गई वृद्धिशीलता पर आधारित है।

इस अभियान के तहत बिहार के बेगूसराय में भी लगातार कार्य हो रहे हैं। हाल के महीनों में बेगूसराय जिला डेल्टा रैंकिंग में भले ही पिछड़ गया हो, लेकिन यहां के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था में हुआ बदलाव प्रधानमंत्री के उद्देश्य को गति जरूर दे रहा है। विद्यालयों की व्यवस्था बदलने में आकांक्षी जिला अभियान के तहत कार्य करने वाली संस्थाएं तथा कुछ प्रगतिशील विचारधारा वाले शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। जिसका प्रतिफल है कि पूर्व की तरह स्कूल में बच्चे ना सिर्फ बागवानी करते हैं, बल्कि अब शिक्षण कार्य की शुरुआत प्रार्थना नहीं चेतना सत्र से होती है।

पहले विद्यालयों में बच्चे लाइन में खड़ा होकर तय किया गया कोई एक प्रार्थना करते थे, बच्चों के ड्रेस में भी एकरूपता नहीं होती थी। लेकिन अब विद्यालय के 99 प्रतिशत बच्चे ड्रेस में विद्यालय आ रहे हैं, विद्यालयों में शिक्षण की शुरुआत चेतना सत्र से होती है। जिसमें अलग-अलग प्रार्थना ही नहीं, नई-नई शारीरिक गतिविधियां भी सिखाई जा रही है, बच्चे अलग-अलग आकृति बनाकर चेतना सत्र में शामिल होते हैं। हालांकि यह सभी विद्यालयों में नहीं हो रहा है, लेकिन मध्य विद्यालय मोहनपुर, मध्य विद्यालय बीहट एवं मध्य विद्यालय रतौली को देखकर यह चैंपियन ऑफ चेंज अभियान अब बेगूसराय के दर्जनों विद्यालयों में लागू हो चुका है।

स्कूल की दीवारों पर शैक्षणिक गतिविधि से जुड़ी नई-नई आकृतियां बनाई गई है, कुछ विद्यालयों को रंग कर रेलगाड़ी का रूप दे दिया गया, जिसके कारण छोटे बच्चे ही नहीं बड़े बच्चे भी चलते-चलते गतिविधि को परख लेते हैं। कक्षा में भी सिर्फ परंपरागत तरीके से किताब से पढ़ाई नहीं होती है, बल्कि खेल-खेल में और हंसते-हंसते बच्चों का शैक्षणिक विकास कराया जा रहा है। हालांकि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा योगदान आकांक्षी जिला बेगूसराय में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रह पीरामल फाउंडेशन के फेलोज (स्वयंसेवकों) की सोच का है। इन्होंने विद्यालय में शिक्षकों और बच्चों को मोटिवेट करके बदलाव लाया तो विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को भी विद्यालय से जोड़ने का प्रयास किया, जिसका प्रतिफल अब लोगों को दिख रहा है।

बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी की सरकार देशवासियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और सभी के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध होकर ”सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के मूलमंत्र पर क्रियाशील है। यह अभियान क्षमता के उपयोग को सक्षम करने के लिए तथा तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में शामिल होने के लिए लोगों की क्षमता में सुधार करने पर केंद्रित है। अच्छे कार्य करने वाले जिले को और प्रोत्साहित किया जाता है, बेगूसराय को भी पुरस्कार मिल चुका है। नीति आयोग जिला स्तर पर तेजी से प्रगति करने के लिए संबंधित मंत्रालयों और विभिन्न विकास भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। सामाजिक और आर्थिक विषयों में सुधार लाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित किया जा रहा है, इसी से विद्यालय में भी बदलाव दिख रहा है।