Mon. Aug 8th, 2022

आई2यू2 समूह से मध्य पूर्व एशिया में बढ़ा भारत का दखल


न्यूयॉर्क, 28 जुलाई (हि.स.)। भारत का कहना है कि नए बने आई2यू2 समूह के माध्यम से मध्य पूर्व एशिया में भारत का दखल बढ़ा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिलिस्तीन मसले पर खुली चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के स्थायी प्रतिनिधि आर. रविंद्र ने कहा कि आई2यू2 के माध्यम से भारत मध्य पूर्व व दक्षिण एशिया की उर्जा, खाद्य सुरक्षा व आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इससे शांति व समृद्धि की राह भी खुलेगी।

आई2यू2 समूह में भारत, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका शामिल हैं। आर रविंद्र ने कहा कि आई2यू2 समूह की हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक के दौरान भारत, इजराइल, यूएई और अमेरिका के बीच जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा में संयुक्त निवेश बढ़ाने पर सहमति बनी थी। 14 जुलाई को बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया था कि इस विशिष्ट समूह का उद्देश्य विश्व के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना संयुक्त निवेश और जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नई पहल के साथ करना है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा कि राष्ट्रपति बाइडन ने इस बैठक के दौरान इजराइल और अन्य देशों के साथ क्षेत्र और बाहर, निकट सहयोग की संभावना जताई थी।

रविंद्र ने इस दौरान इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हालिया घटनाक्रम, विशेषकर हिंसक हमलों, नागरिकों की हत्याओं, विध्वंसक और उकसावे की कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा ऐसी घटनाओं का विरोध करता है और इन्हें पूरी तरह रोकने का हिमायती है। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच राजनीतिक सहमति के बिना क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थायित्व संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजनीतिक प्रयास बढ़ाने चाहिए। उन्होंने राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से इस मसले का जल्द समाधान निकालने की वकालत की।

रविंद्र ने कहा कि इजराइल और फिलिस्तीन के बीच भारत लगातार सीधी शांति वार्ता का हिमायती रहा है। भारत का मानना है कि दो देश बनाने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए यही सबसे सही रास्ता है। यह वार्ता अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति वाले ढांचे के मुताबिक हो। इसमें फिलिस्तीन के लोगों की अलग देश पाने और इजराइल की सुरक्षा चिंताओं का ध्यान रखा जाए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सुरक्षा परिषद को इजराइल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया बाधित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ सख्त संकेत भेजना चाहिए।