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अमेठी में प्रत्याशी से ज्यादा चुनाव चिह्न का महत्व

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लखनऊ, 25 फरवरी(हि.स.)। जिले की सदर सीट हमेशा से रोमांचक मुकाबले के लिए जानी जाती रही है। आज पांचवें चरण के प्रचार का शोर थम जायेगा और इसके बाद अमेठी सदर पर जोड़तोड़ की राजनीति शुरु होगी। वैसे अमेठी की जनता प्रत्याशी से ज्यादा चुनाव चिह्न को महत्व दे रही है।
अमेठी सीट पर 2022 में रोमांचक मुकाबला होने जा रहा है। 27 फरवरी को मतदान के बाद 10 मार्च को आने वाला फैसला भी असाधारण होगा। जिले में भाजपा के कार्यकर्ता रहे आशीष शुक्ला को कांग्रेस ने टिकट देकर मैदान में उतारा तो कांग्रेस के टिकट पर 2019 में सुल्तानपुर से लोकसभा टिकट लड़ चुके संजय सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है।
दोनों ही प्रत्याशियों की क्षेत्र में अपनी पहचान होने के बावजूद जनभावनाएं पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा जुड़ी हुई है। जेल में बंद गायत्री प्रजापति की पत्नी और समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी महाराजी प्रजापति एवं बसपा की प्रत्याशी रागिनी तिवारी भी चुनाव चिह्न के दम पर ही चुनाव लड़ रही हैं।
अमेठी सीट पर कांग्रेस की हवा बनाने के लिए महासचिव प्रियंका वाड्रा के भी चुनाव लड़ने की हवा बनायी गयी, जो कार्यकर्ताओं में जोश भरने के काम आयी। अमेठी में प्रचार के लिए निकली प्रियंका ने रास्ते में लखनऊ में मरी माता मंदिर में हाथ जोड़े और अमेठी के ब्राह्मण परिवार में इसको सराहा गया।
रेलवे स्टेशन रोड निवासी अजय, वीरेन्द्र कहते हैं कि जिले में कभी वक्त था कि कांग्रेस का झंडा ही फहरा करता था। वक्त बदला और इस बार भाजपा ने अपना झंडा फहराया। स्मृति ईरानी जीती और कुछ करने में जुटी तो कर दिखाया। वे दूध का व्यापार करते हैं, इसी क्षेत्र के है। सभी प्रत्याशियों को जानते है। इसी कारण यह कह सकते हैं कि पार्टियों के चुनाव चिह्न देखकर ही मतदान होगा, प्रत्याशी देखकर नहीं।
शिक्षक अरुण सिंह कहते हैं कि ये चुनाव अमेठी का भविष्य तय करेगा, जो जीतेगा वही सरकार बनायेगा। यहां चुनाव चिह्न की लड़ाई है। कांग्रेस और भाजपा से सीधी टक्कर है। इनके बड़े नेताओं का साख भी दांव पर लगी हुई हैं।