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(अपडेट) रामगढ़ हाईवे पर लॉरी ने छह वाहनों में मारी टक्कर, चार की मौत


रामगढ़, 15 फरवरी (हि.स.)। रामगढ़ में मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 33 पर एक लॉरी ने पलक झपकते चार लोगों को मौत की नींद सुला दिया, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सीसीटीवी से यह साफ पता चल रहा है कि महज चार सेकेंड में लॉरी ने सैनी होटल से लेकर पोद्दार पंप तक छह गाड़ियों को टक्कर मार दिया।
रांची से रामगढ़ की ओर 74 चक्के की लॉरी (जीजे 06 बीटी – 6325) किसी प्लांट की हैवी मशीन लेकर जा रही थी। घाटी से उतरते ही उसका ब्रेक फेल हुआ और फिर वह लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सड़क पर दौड़ने लगी। वन-वे सड़क पर लहराती हुई लॉरी ने सबसे पहले दो बाइक सवारों को चपेट में लिया। इसके बाद एक-एक कर तीन कारों को टक्कर मारी। अंत में पटेल चौक पर स्थित पोद्दार पेट्रोल पंप से निकलती हुए एक टाटा 709 को टक्कर मारते हुए लॉरी वहीं रुक गई।
लॉरी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि उसके सभी चक्कों से धुआं निकलने लगा था। कुछ चक्कों में तो आग की लपटें भी उठने लगी थी। आनन-फानन में पेट्रोल पंप के कुछ कर्मचारियों ने आग को बुझाया गया और फिर वहां राहत बचाव कार्य शुरू हुआ। इस हादसे में रांची जिले के विकास निवासी मिंटू शर्मा, ओरमांझी थाना क्षेत्र के हुंडा होली गांव निवासी चामो सिंह, विनोद करमाली और रामगढ़ शहर के दुर्गी बस्ती निवासी विजय करमाली की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले रामगढ़ थाना प्रभारी रोहित कुमार दलबल के साथ पहुंचे। उन्होंने राहत बचाव कार्य शुरू किया। कार में फंसे लोगों और घायलों को उन्होंने अपनी गाड़ी से सदर अस्पताल तक पहुंचाया।
हादस के लिए एनएचएआई को ठहराया कसूरवार
स्थानीय लोगों ने हादसे के लिए एनएचएआई के अधिकारी और उनके ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराया। लोगों का कहना था कि एनएचएआई ने पटेल चौक पर फ्लाईओवर बनाने का निर्णय किया है। जिस ठेकेदार को यह काम दिया गया है उसके द्वारा पूरी सड़क ही खोद डाली गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि वहां चलने वाली हर गाड़ी कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती है। चुटूपालू घाटी से उतरते हुए कई गाड़ियों की स्पीड काफी अधिक बढ़ जाती है लेकिन ना तो सही डायवर्सन बनाया गया है और ना ही कोई उचित दिशा निर्देश का पालन किया जा रहा है। घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों को भी यह बात समझ में आई कि एनएचएआई के ठेकेदार मनमाने तरीके से वहां कार्य कर रहे हैं।
इतना ही नहीं सात गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त थी। चार लोगों के शव सड़क पर पड़े थे लेकिन एनएचएआई के अधिकारी नदारद थे। उनके द्वारा ना तो कोई राहत बचाव कार्य शुरू किया गया और ना ही दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों को हटाने के लिए हाइड्रा और क्रेन उपलब्ध कराए गए। यहां तक कि शवों को उठाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराया गया। पुलिस प्रशासन ने जब अपना काम शुरू किया तो एनएचएआई के कुछ अधिकारी वहां सिर्फ चेहरा चमकाने पहुंच गए।
ग्रामीणों ने एनएचएआई पर आरोप लगाया कि पोद्दार पंप को बचाने के लिए हाईवे का कर्व काफी अधिक बढ़ा दिया गया है। जिस तरीके से वहां रोड का मैप बना है उससे सड़क और अधिक खतरनाक हो गई है। लोड गाड़ियों को वहां पर संतुलन बनाए रखना काफी मुश्किल हो जाता है। शायद किसी ऊंची पैरवी या कोई तिकड़म लगाकर पेट्रोल पंप को वहां पर बचाने की कोशिश की जा रही है।
सीसीटीवी में कैद हुई दुर्घटना
यह दुर्घटना सीसीटीवी में कैद हुई है। घटनास्थल पर पहुंचे एसडीओ मोहम्मद जावेद हुसैन, एसडीपीओ किशोर कुमार रजक और थाना प्रभारी रोहित कुमार ने पेट्रोल पंप में लगे सीसीटीवी की जांच की है। उन्होंने यह देखा कि महज चार सेकंड में सैनी होटल की तरफ से काफी तेज गति से आ रही लॉरी पेट्रोल पंप तक पहुंची। इस बीच में जो भी उसके रास्ते में आया उसे रौंद दिया। पेट्रोल पंप के पास ही लोरी का इंजन पलट गया और उसके पीछे का हिस्सा महिंद्रा एक्सयूवी को चपेट में लेता हुआ गड्ढे में समा गया।