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अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ मदन कश्यप और ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ अरविंदाक्षन को


-‘शब्द साहित्यिक संस्था’ ने की अपने प्रथम दो वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा

बेंगलुरु, 09 सितंबर (हि.स.)। देश की सॉफ्टवेर राजधानी बेंगलुरु के हिंदी रचनाकारों की प्रसिद्ध ‘शब्द साहित्यिक संस्था’ ने अपने वर्तमान रजत जयंती वर्ष से शुरू किए गए दो वार्षिक पुरस्कारों- ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ और ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ के विजेताओं की आज घोषणा की। एक लाख रुपये का पहला ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ हिंदी के मूर्धन्य कवि मदन कश्यप को उनकी काव्य कृति ‘पनसोखा है इंद्रधनुष’ के लिए प्रदान किया जाएगा। वहीं, इक्कीस हजार रुपये का पहला ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ प्रो ए. अरविंदाक्षन को दक्षिण भारत में हिंदी भाषा एवं साहित्य के संवर्द्धन में उल्लेखनीय अवदान के लिए दिया जाएगा।

शब्द साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष डॉ. श्रीनारायण समीर ने शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में बताया कि निर्णायक मंडल में डॉ. श्रीनारायण समीर और सचिव श्रीकांत शर्मा के अतिरिक्त बाबूलाल गुप्ता फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक बाबूलाल गुप्ता और ‘दक्षिण भारत राष्ट्रमत’ पत्र समूह के प्रधान संपादक श्रीकांत पाराशर तथा ‘शब्द’ की संस्थापक सरोजा व्यास शामिल थे। उन्होंने बताया कि दोनों पुरस्कार विजेताओं को आगामी 18 दिसंबर को बेंगलुरु में आयोजित एक सारस्वत समारोह में पुरस्कार राशि के साथ पारंपरिक मैसूर पेटा, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा।

दोनों पुरस्कारों का निर्णय हिंदी भाषा और साहित्य के सर्जक विद्वानों की पांच सदस्यीय मूल्यांकन समिति की संस्तुति के आधार पर निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से किया। निर्णय में संबंधित साहित्यकारों की कृतियों के पारदर्शी मूल्यांकन के साथ-साथ उनके अब तक के सर्जनात्मक अवदान को भी आधार बनाया गया। निर्णायक मंडल ने ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ के लिए अपनी संस्तुति में कहा है कि मदन कश्यप समकालीन हिंदी कविता में अनुराग और करुणा के तलस्पर्शी कवि हैं। उनकी कविता मनुष्य की गरिमा, नैसर्गिक सौन्दर्य एवं रागानुभूति की विरल अभिव्यक्ति है।

‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ के लिए पालक्काड, केरल के प्रो. ए. अरविंदाक्षन के नाम की संस्तुति में निर्णायक मंडल ने कहा है कि प्रो. अरविंदाक्षन ने अपने दीर्घ अध्यापन और लेखन से अपने छात्रों और संपर्क के लोगों के मन एवं मस्तिष्क में हिंदी भाषा के प्रति अनुराग की जो लौ जलाई, उसकी रोशनी न केवल केरल में; बल्कि पूरे दक्षिण भारत में फैली है। उन्होंने अपने आचरण और व्यवहार से भाषाई भेदभाव खत्म करने तथा राष्ट्र की भाव धारा को सशक्त करने का अन्यतम कार्य किया है।

डॉ समीर ने बताया कि ‘शब्द साहित्यिक संस्था’ के आगामी 18 दिसंबर को बेंगलुरु में आयोजित वार्षिक समारोह में दोनों पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ बेंगलूरु के प्रसिद्ध समाजसेवी और अज्ञेय साहित्य के मर्मज्ञ बाबूलाल गुप्ता के फाउंडेशन के सौजन्य से दिया जाएगा। इसी तरह ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ बेंगलूरु और चेन्नई से प्रकाशित प्रमुख हिंदी समाचार पत्र समूह ‘दक्षिण भारत राष्ट्रमत’ के सौजन्य से दिया जाएगा। उक्त पुरस्कारों के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन कथालोचक प्रो. अरविन्द कुमार, वरिष्ठ कवि अनिल विभाकर, गीतकार डॉ प्रेम तन्मय और कवयित्री डॉ उषा रानी राव की समिति ने किया। निर्णायक मंडल ने मूल्यांकनकर्ताओं के मूल्यांकन एवं सिफारिश पर समग्र रूप से विचार करते हुए पुरस्कार विजेताओं के नाम पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया। ‘शब्द’ के अध्यक्ष डॉ. समीर मूल्यांकन समिति और निर्णायक मंडल दोनों के संयोजक थे।